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डेगनाला (पूंछकटवा)रोग से पशुओं के बचाव एवं चिकित्सा पढ़े किसान भाई

डेगनाला रोग किसान भाई कैसे इसकी पहचान कर सके

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आज हम आपको पशुओं में मुख्य रूप से भैंसों में होने वाली तथा अन्य पशु जैसे गाय में भी इसके लक्षण पाय जाते हैं कृषि वाणी टीम के द्वारा प्राप्त कि गई जानकारी को आपके सामने बता रहे हैं यह बीमारी है डेगनाला जिसके बारे में बताने जा रहे है कि किसान भाई कैसे इसकी पहचान करने के साथ साथ पशुओं को ऐसी बिमारियों से बचा सके

डेगनाला रोग के लक्षण -पशुओं में डेगनाला रोग मुख्यतः भैंस जाति के पशुओं में होता है इसे पूंछकटवा रोग भी कहते हैं जो गौ जाति के भी पशुओं को भी प्रभावित करता है इस रोग में मुख्य लक्षण के शुरुआत पूंछ, कान, आदि सूखने लगते हैं पैर के निचले भाग में भी सबसे पहले सूजन हो जाता है और अंततः वहां का मांस सड़ कर गिर जाता है साथ ही पशु भोजन बंद कर देता है और दिन प्रतिदिन कमजोर होता जाता है

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रोग से बचाव

  • चारा व् पानी में बदलाव आवश्यक है तथा साफ रखना होगा
  • सड़ा पुआल एवं गन्दा पानी का उपयोग वर्जित है
  • खाने में उच्च स्तर का प्रोटीन भोजन जैसे सरसो,तीसी, बादाम कि खल्ली, एवं दलहन से भी जुडी चीजे जिनमें प्रोटीन कि मात्रा अधिक होती है उसे भी नियमित रूप से चारे में खिलाना चाहिए
  • अच्छी गुणवत्ता वाली मिनरल मिक्सचर शरीर के वजन के अनुसार उचित मात्रा में भी दो महीने तक खिलाना चाहिए साथ ही पिने का साफ तजा पानी भी उचित मात्रा में देना चाहिए
  • रोग ग्रसित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए
  • पशुओं के रहने वाली जगह का भी साफ़ स्वत्छता का भी विशेष ध्यान रखना है जिससे वहां पर नमी कि मात्रा ज्यादा न रहे साथ ही नियमित रूप से साफ़ सफाई हेतु कीटनाशक एवं विषाणुओं को मरने वाले घोल का भी नियमित छिड़काव करते रहे

रोग से ग्रसित पशुओं के लिए चिकित्सीय सुझाव

  • प्रभावित भाग को अच्छे स इ ऐंटी सेप्टिक सलूशन से साफ कर लें
  • यदि गला हुआ अंग हो तो लोकल एनेस्थीसिया का प्रयोग करें साथ ही गले भाग के एक इंच ऊपर से काट कर अलग कर दें और बचे हुए अंग पर एंटीसेप्टिक या एंटीबायोटिक का प्रयोग कर अच्छे से जख्म सूखने तक ख्याल रखा जाना चाहिए तथा नियमित रूप से साफ़ सफाई के साथ ड्रेसिंग करते रहना चाहिए
  • घाव को सूखने के लिए लम्बे समय तक पशु के वजन के अनुसार एंटीबायोटिक देना चाहिए जिससे घाव जल्द से जल्द सुख सके
  • विटामिन ए, डी३, इ एवं सेलेनियम युक्त दवा का उपयोग किया जाय साथ ही प्रोबायोटिक एवं विटामिन बी काम्प्लेक्स का प्रयोग करना चाहिए
  • टी वर्व कैप्सूल एवं अन्य आयुर्वेदिक चरम रोग दवाओं का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए

किसान भाइयों ये तो थी पशुओं में होने वाली बीमारी के कुछ लक्षण एवं उसके बचाव के उपाय अगर आप ज्यादा समझ नहीं पाते तो अपने नियमित पशु चिकत्सक से संपर्क कर भी उपचार करवा सकते है या फिर अपने नजदीक के कृषि विज्ञानं केंद्र में भी जा कर आप वैज्ञानिकों कि सलाह ले सकते हैं जिससे आपके पशुओं के सही समय पर देखभाल भी हो सके साथी ही आपके पशु स्वस्थ भी रह सके किसान भाइयों हम कृषि वाणी का प्रयास है कि आप तक कृषि एवं पशुपालन से जुडी हर जानकारी जो किसान भाइयों के लिए उपयोग में हो आप तक नियमित रूप से उपलब्ध करते रहेंगे आपसे अनुरोध है कि आप इस मुख्य जानकारी को अपने किसान दोस्तों को भी जरूर शेयर करें जिससे उनको भी अपने पशुओं को इस बीमारी से बचा सके

 

 

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