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मक्का के साथ बोरो या बरबटी या अरहर की खेती करने से होगा लाभ

मक्का के साथ बोरो या बोरी या बरबटी या अरहर की खेती करने से होगा लाभ

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(BIHAR)!बड़हरिया प्रखंड के औराई पंचायत के सोहावनहाता गांव में आत्मा सौजन्य से सहायक तकनीकी प्रबन्धक सतीश सिंह के देखरेख में गठित सोहावनहाता कृषक हित समूह के किसान जवाहरलाल यादव,काशीनाथ यादव, राकेश सिह द्रारा मक्का के साथ बोरी की खेती किया गया है।जो एक लाईन में मक्का और दो लाईन में बोरी लगाए हैं।तथा बैजनाथ यादव, सिपाही यादव, शिवनाथ सिंह,कामेश्वर सिंह द्रारा मक्का के साथ अरहर की खेती की गयी है। जो एक लाईन मक्का और एक लाईन अरहर लगाए है। जिसका निरीक्षण सहायक तकनीकी प्रबन्धक सतीश सिंह एवम किसान सलाहकार नन्दलाल प्रसाद के द्रारा किया गया। सहायक तकनीकी प्रबन्धक सतीश सिंह ने बताया कि इस तरह कि खेती से किसान को अनेको लाभ होता है।क्योकि बोरी या अरहर एक दलहनी फसल है।जिसके जड़ों में गांठें पायी जाती है।जिसमे राईजोबियम नामक वैक्टिरिया पाया जाता है।जो वायुमंडल मे उड़ रहे नाइट्रोजन को अपने जड़ो मे इक्ठ्ठा करते रहते हैं।बोरी और अरहर को उर्वरक की कम आवश्यक होती है क्योंकि पौधे अपने जड़ मे इक्ठ्ठा किऐ नाइट्रोजन को अपने आवश्यकता अनुसार लेते रहते हैं।ऐसी खेती मे खाद कम लगते हैं।साथ मे वह खेत उपजाऊ भी रहता है।इस विधि से हमें एक साथ दो फसल मिल जाता है। अगर एक फसल किसी कारण बस नही हुआ तो दुसरा फसल जरूर हो जाता है।ऐसी खेती करने मे लागत कम और उत्पादन व लाभ अधिक होता है।ऐसी खेती मे बोरो मक्का पर चढ़कर लम्बा और अच्छा उत्पादन देता है। समूह के किसानों द्रारा दोनो तरह कि खेती एक एक हेक्टेयर मे कि गयी है।बोरी या अरहर की खेती करने से मृदा मे सुधार के साथ साथ ऊपजाउ व उर्वरता शक्ति बढता है।

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